छन्द

Anuṣṭubh

अनुष्टुभ्anuṣṭubh

अक्षर प्रति पाद
8
प्रकार
जाति — अक्षरों से गिनी

चार पाद, प्रत्येक 8 अक्षर का; चारों एक-से बने हैं।

सबसे प्रचलित छन्द — इस पुस्तकालय का आधे से अधिक। पाद में केवल 5वें से 7वें अक्षर नियत हैं। विषम पादों का 7वाँ अक्षर गुरु हो तो पथ्या, सामान्य रूप; विचलन विपुला कहलाते हैं और छन्द नहीं तोड़ते।

लक्षण

1×××××
2×××××
3×××××
4×××××

× का अर्थ है स्वतन्त्र स्थान: वहाँ लघु और गुरु दोनों चलेंगे।

चिह्न कैसे पढ़ें

  • लघु — छोटा अक्षरएक मात्रा। छोटा और हल्का बोला जाता है।
  • गुरु — दीर्घ अक्षरदो मात्राएँ: लघु से ठीक दुगुना खिंचता है। पंक्ति में उस पर हल्की छाया भी रहती है।
  • पाद-सीमाश्लोक चार चरणों — पादों — में बँटा होता है। सीमा पर छोटा विराम।
  • यतिलम्बे पाद के भीतर साँस लेने का स्थान। छोटी और हल्की रेखा।

उदाहरण

श्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य तीं मूम्
व्यूढां द्रुपुत्रे शिष्ये धीता

paśyaitāṁ ṇḍuputrāṇām ārya mahatīṁ camūm |
vyūḍhāṁ drupadaputreṇa tava śiṣyeṇa dhīma ||

भगवद्गीता 1.3श्लोक खोलें