छन्द
संस्कृत पद्य छन्दोबद्ध है: उसमें लघु और गुरु अक्षर बारी-बारी आते हैं, और इसी क्रम से पद्य पहचाना, नामित और गाया जाता है। यहाँ बताया गया है कि चिह्न कैसे पढ़ें और इस पुस्तकालय में कौन-कौन से छन्द मिलते हैं।
चिह्न कैसे पढ़ें
- ⏑लघु — छोटा अक्षरएक मात्रा। छोटा और हल्का बोला जाता है।
- –गुरु — दीर्घ अक्षरदो मात्राएँ: लघु से ठीक दुगुना खिंचता है। पंक्ति में उस पर हल्की छाया भी रहती है।
- पाद-सीमाश्लोक चार चरणों — पादों — में बँटा होता है। सीमा पर छोटा विराम।
- यतिलम्बे पाद के भीतर साँस लेने का स्थान। छोटी और हल्की रेखा।
पाठक में चिह्न सेटिंग्स से या M कुंजी से चालू होते हैं।
अक्षर गुरु कब होता है
- स्वर दीर्घ हो: ā, ī, ū, ṝ, e, ai, o, au।
- स्वर के बाद अनुस्वार (ṃ, ṁ) या विसर्ग (ḥ) हो।
- स्वर के बाद दो या अधिक व्यंजन हों — उसी शब्द में या अगले में।
शेष सब में अक्षर लघु है। महाप्राण (kh, gh, ch, jh, ṭh, ḍh, th, dh, ph, bh) एक व्यंजन है, दो नहीं।
पाद का अन्तिम अक्षर स्वतन्त्र माना जाता है: उसे खींचा भी जा सकता है।