- अक्षर प्रति पाद
- 17
- प्रकार
- समवृत्त — चारों पाद समान
- गण
- ma bha na ta ta ga ga
- यति अक्षर के बाद
- 4 · 10
चार पाद, प्रत्येक 17 अक्षर का; चारों एक-से बने हैं।
लक्षण
1––––⏑⏑⏑⏑⏑––⏑––⏑––
2––––⏑⏑⏑⏑⏑––⏑––⏑––
3––––⏑⏑⏑⏑⏑––⏑––⏑––
4––––⏑⏑⏑⏑⏑––⏑––⏑––
चिह्न कैसे पढ़ें
- ⏑लघु — छोटा अक्षरएक मात्रा। छोटा और हल्का बोला जाता है।
- –गुरु — दीर्घ अक्षरदो मात्राएँ: लघु से ठीक दुगुना खिंचता है। पंक्ति में उस पर हल्की छाया भी रहती है।
- पाद-सीमाश्लोक चार चरणों — पादों — में बँटा होता है। सीमा पर छोटा विराम।
- यतिलम्बे पाद के भीतर साँस लेने का स्थान। छोटी और हल्की रेखा।
उदाहरण
उत्पत्त्य्-अध्वन्य् अशरण उरु-क्लेश-दुर्गे ऽन्तकोग्र-
व्यालान्विष्टे विषय-मृग-तृष्य् आत्म-गेहोरु-भारः
द्वन्द्व-श्वभ्रे खल-मृग-भये शोक-दावे ऽज्ञ-सार्थः
पादौकस् ते शरणद कदा याति कामोपसृष्टः
utpatty-adhvany aśaraṇa uru-kleśa-durge 'ntakogra-
vyālānviṣṭe viṣaya-mṛga-tṛṣy ātma-gehoru-bhāraḥ
dvandva-śvabhre khala-mṛga-bhaye śoka-dāve 'jña-sārthaḥ
pādaukas te śaraṇada kadā yāti kāmopasṛṣṭaḥ
श्रीमद्भागवतम् 4.7.28श्लोक खोलें