ग्रंथ पुस्तकालय
शब्दशः विश्लेषण और भाष्य सहित प्रामाणिक संस्कृत ग्रंथ।
श्भगवद्गीताकुरुक्षेत्र के मैदान पर भगवान कृष्ण और अर्जुन का संवाद — आत्मा, धर्म, योग और भक्ति पर वैदिक ज्ञान का सार। संस्कृत, लिप्यंतरण, शब्दार्थ और साहित्यिक अनुवाद।RUENESHIZHश्ब्रह्मसंहिताब्रह्मसंहिता वह स्तोत्र है जिससे सृष्टिकर्ता ब्रह्मा गोविन्द के धाम का दर्शन करके उनकी स्तुति करते हैं। संहिता के सौ अध्यायों में से केवल पाँचवाँ अध्याय बचा है: श्री चैतन्य महाप्रभु ने 1512 में दक्षिण भारत के आदिकेशव मन्दिर में उसकी पाण्डुलिपि पाई और बंगाल ले आए, और तभी से वह स्वतन्त्र ग्रन्थ के रूप में पढ़ा जाता है। बासठ श्लोक: गोकुल की रचना, भौतिक जगत् की उत्पत्ति, अन्धकार में ब्रह्मा का प्राकट्य और उन्हें दिया गया मन्त्र, तथा फिर एक ही टेक वाले अट्ठाईस श्लोक — गोविन्दम् आदिपुरुषं तमहं भजामि। यहाँ शब्दार्थ, साहित्यिक अनुवाद और टिप्पणी सहित मूल पाठ दिया गया है; जीव गोस्वामी की दिग्दर्शिनी टीका इस पुस्तक में सम्मिलित नहीं है।RUदिदिग्दर्शनी टीकादिग्दर्शनी जीव गोस्वामी (सोलहवीं शताब्दी) की ब्रह्मसंहिता के पञ्चम अध्याय पर टीका है। नाम का अर्थ है «दिशा दिखानेवाली»: जीव प्रत्येक पंक्ति की व्याख्या नहीं करते, वे बताते हैं कि कहाँ देखना है। वे अपने श्लोकों से आरम्भ करते हैं, सनातन को ज्येष्ठ भ्राता और रूप को आश्रय कहते हुए, और बताते हैं कि बचा हुआ एक अध्याय पूरे संहिता के लिए वैसा ही है जैसा किसी ग्रन्थ के लिए सूत्र; फिर प्रथम श्लोक पर ही वे «कृष्ण» नाम का सम्पूर्ण अनुसन्धान प्रस्तुत करते हैं। प्रत्येक इकाई में श्लोक और टीका — दोनों शब्दार्थ और साहित्यिक अनुवाद सहित — तथा उसके बाद हमारी टिप्पणी दी गई है।RUहरहरिवंशमहाभारत का परिशिष्ट, जो हरि के वंश की महिमा गाता है और श्री कृष्ण के उद्भव, अवतरण एवं लीलाओं को प्रकट करता है।RUमहमहाभारतव्यास का महान महाकाव्य। इसका मूल नाम «जय» («विजय») है। इसमें भगवद्गीता (भीष्म-पर्व) सम्मिलित है और यह वैदिक दर्शन के प्रमुख स्रोतों में से एक है।RUरारामायणवाल्मीकि का प्राचीन महाकाव्य — भगवान राम के जीवन, उनके धर्म, वनवास, सीता की खोज और रावण पर विजय की कथा।RUउपउपनिषद्उपनिषद् — वैदिक परंपरा का दार्शनिक सार, जो ब्रह्म, आत्मा, ज्ञान, कर्म और मोक्ष के स्वरूप को प्रकट करता है। दस प्रमुख उपनिषदों के साथ चुनी हुई लघु वैष्णव उपनिषदें।RUENब्ब्रह्मसूत्रबादरायण व्यास का वेदान्त-सूत्र (ब्रह्मसूत्र) — उपनिषदों के सिद्धान्त को व्यवस्थित करनेवाले अत्यन्त संक्षिप्त सूत्रों का संग्रह। चार अध्याय: समन्वय, अविरोध, साधन और फल — मोक्ष। यहाँ शुद्ध सूत्र-पाठ शब्दशः अर्थ और साहित्यिक अनुवाद के साथ दिया गया है, भाष्य के बिना; प्रमुख वेदान्त-सम्प्रदायों के भाष्य अलग पुस्तकों के रूप में प्रकाशित होते हैं। पाठ मध्व-सम्प्रदाय की वाचना (५६४ सूत्र) का अनुसरण करता है।RUगोगोविन्दभाष्यबलदेव विद्याभूषण (१८वीं शती) का गोविन्दभाष्य — वेदान्तसूत्र पर गौड़ीय वैष्णव भाष्य, ब्रह्म-मध्व परम्परा में। सिद्धान्त — अचिन्त्य-भेदाभेद: सूत्रों का ब्रह्म भगवान् श्रीकृष्ण (गोविन्द) हैं; जगत् उनकी शक्ति का परिणाम है; जीव उनका नित्य अंश है; साधन भक्ति है, फल — पुनरावृत्ति-रहित नित्य सेवा। प्रत्येक सूत्र के लिए भाष्य का रूसी निरूपण।RU