पुस्तकालयश्रीबृहद्भागवतामृत
vaishnava

श्रीबृहद्भागवतामृत

रचयिता: सनातन गोस्वामी

षड्गोस्वामियों में ज्येष्ठ सनातन गोस्वामी की कृति, अनुज रूप के लघुभागवतामृत की सहचरी: वह तत्त्व की, यह मार्ग की। प्रथम खण्ड में नारद उस भक्त को खोजते हैं जिस पर भगवान् की कृपा सर्वाधिक है — ब्राह्मण से राजा, इन्द्र, ब्रह्मा, शिव, प्रह्लाद, हनुमान्, पाण्डव, उद्धव — और मार्ग व्रज में गोपियों पर समाप्त होता है। द्वितीय खण्ड में गोपकुमार स्वर्ग, वैकुण्ठ, अयोध्या और द्वारका होते हुए उसी भूमि पर लौटता है जहाँ से चला था।

उपलब्ध भाषाएँRU
पहले श्लोक से शुरू करें

विषय-सूची

1प्रथम खण्ड: भगवत्कृपासारनिर्धार7 अध्याय2द्वितीय खण्ड: गोलोकमाहात्म्य7 अध्याय