पुस्तकालयश्रीकृष्णकर्णामृतम्
vaishnava
श्रीकृष्णकर्णामृतम्
«कृष्ण-कर्णामृत» — बिल्वमङ्गल ठाकुर (लीलाशुक) की काव्य-रचना। तीन आश्वास, ३२८ श्लोक; हर श्लोक अपने आप में पूर्ण, कोई कथा-क्रम नहीं। कवि सदा वही कहता है जो इस क्षण देखता है — वंशी वाला बालक, अधर पर दूध, मयूर-पिच्छ, माखन-चोरी, कटाक्ष। वही कुछ थोड़ी-सी बातें सैकड़ों रूपों में लौटती हैं, और यही लौटना ही यह ग्रन्थ है। यहाँ दाक्षिणात्य पाठ अनूदित है, जो पूर्ण और अखण्डित है।
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