- अक्षर प्रति पाद
- 10
- प्रकार
- अर्धसमवृत्त — अर्ध भिन्न
- गण
- sa sa ja ga / sa bha ra la ga
विषम पाद 10 अक्षर के, सम पाद 11 अक्षर के: दोनों अर्ध भिन्न हैं।
लक्षण
1⏑⏑–⏑⏑–⏑–⏑–
2⏑⏑––⏑⏑–⏑–⏑–
3⏑⏑–⏑⏑–⏑–⏑–
4⏑⏑––⏑⏑–⏑–⏑–
चिह्न कैसे पढ़ें
- ⏑लघु — छोटा अक्षरएक मात्रा। छोटा और हल्का बोला जाता है।
- –गुरु — दीर्घ अक्षरदो मात्राएँ: लघु से ठीक दुगुना खिंचता है। पंक्ति में उस पर हल्की छाया भी रहती है।
- पाद-सीमाश्लोक चार चरणों — पादों — में बँटा होता है। सीमा पर छोटा विराम।
- यतिलम्बे पाद के भीतर साँस लेने का स्थान। छोटी और हल्की रेखा।
उदाहरण
अथ सा पतिपादपङ्कज
द्वयम् आलिङ्ग्य सगद्गदस्वरम् ।
परिदेवनयानया मुहुर्
बहुधा नेत्रजलैर् असेचयत्
atha sā pati-pāda-paṅkaja-
dvayam āliṅgya sa-gadgada-svaram |
paridevanayānayā muhur
bahudhā netra-jalair asecayat
चैतन्यचरितामृत महाकाव्य 2.120श्लोक खोलें