छन्द

Upajāti

उपजातिupajāti

अक्षर प्रति पाद
11
प्रकार
समवृत्त — चारों पाद समान
गण
indravajrā and upendravajrā mixed
यति अक्षर के बाद
5

चार पाद, प्रत्येक 11 अक्षर का; चारों एक-से बने हैं।

यह स्वतन्त्र छन्द नहीं, बल्कि वह श्लोक है जिसके पाद इन्द्रवज्रा और उपेन्द्रवज्रा को स्वतन्त्र रूप से मिलाते हैं: दोनों में भेद केवल पहले अक्षर का है।

लक्षण

1×
2×
3×
4×

× का अर्थ है स्वतन्त्र स्थान: वहाँ लघु और गुरु दोनों चलेंगे।

चिह्न कैसे पढ़ें

  • लघु — छोटा अक्षरएक मात्रा। छोटा और हल्का बोला जाता है।
  • गुरु — दीर्घ अक्षरदो मात्राएँ: लघु से ठीक दुगुना खिंचता है। पंक्ति में उस पर हल्की छाया भी रहती है।
  • पाद-सीमाश्लोक चार चरणों — पादों — में बँटा होता है। सीमा पर छोटा विराम।
  • यतिलम्बे पाद के भीतर साँस लेने का स्थान। छोटी और हल्की रेखा।

उदाहरण

हि प्रश्यामि मानुद्या-
द्यच्छोमुच्छोमिन्द्रियाणाम्
वाप्य भूमात्नमृद्धं
राज्यं सुराणापि चाधित्यम्

na hi prapaśyāmi mapanudyād
yac chokam ucchoṣaṇam indriṇām |
apya bhūv asapatnam ṛddhaṁ
jyaṁ suṇām api dhipatyam ||

भगवद्गीता 2.8श्लोक खोलें