- अक्षर प्रति पाद
- 11
- प्रकार
- समवृत्त — चारों पाद समान
- गण
- ja ta ja ga ga
- यति अक्षर के बाद
- 5
चार पाद, प्रत्येक 11 अक्षर का; चारों एक-से बने हैं।
लक्षण
1⏑–⏑––⏑⏑–⏑––
2⏑–⏑––⏑⏑–⏑––
3⏑–⏑––⏑⏑–⏑––
4⏑–⏑––⏑⏑–⏑––
चिह्न कैसे पढ़ें
- ⏑लघु — छोटा अक्षरएक मात्रा। छोटा और हल्का बोला जाता है।
- –गुरु — दीर्घ अक्षरदो मात्राएँ: लघु से ठीक दुगुना खिंचता है। पंक्ति में उस पर हल्की छाया भी रहती है।
- पाद-सीमाश्लोक चार चरणों — पादों — में बँटा होता है। सीमा पर छोटा विराम।
- यतिलम्बे पाद के भीतर साँस लेने का स्थान। छोटी और हल्की रेखा।
उदाहरण
अदृष्टपूर्वं हृषितोऽस्मि दृष्ट्वा
भयेन च प्रव्यथितं मनो मे ।
तदेव मे दर्शय देव रूपं
प्रसीद देवेश जगन्निवास ॥
adṛṣṭa-pūrvaṁ hṛṣito 'smi dṛṣṭvā
bhayena ca pravyathitaṁ mano me |
tad eva me darśaya deva rūpaṁ
prasīda deveśa jagan-nivāsa ||
भगवद्गीता 11.45श्लोक खोलें