- अक्षर प्रति पाद
- 11
- प्रकार
- समवृत्त — चारों पाद समान
- गण
- ra na bha ga ga
चार पाद, प्रत्येक 11 अक्षर का; चारों एक-से बने हैं।
लक्षण
1–⏑–⏑⏑⏑–⏑⏑––
2–⏑–⏑⏑⏑–⏑⏑––
3–⏑–⏑⏑⏑–⏑⏑––
4–⏑–⏑⏑⏑–⏑⏑––
चिह्न कैसे पढ़ें
- ⏑लघु — छोटा अक्षरएक मात्रा। छोटा और हल्का बोला जाता है।
- –गुरु — दीर्घ अक्षरदो मात्राएँ: लघु से ठीक दुगुना खिंचता है। पंक्ति में उस पर हल्की छाया भी रहती है।
- पाद-सीमाश्लोक चार चरणों — पादों — में बँटा होता है। सीमा पर छोटा विराम।
- यतिलम्बे पाद के भीतर साँस लेने का स्थान। छोटी और हल्की रेखा।
उदाहरण
प्रेयसा सह नवीनतमाल
श्यामलेन विपिनं प्रविशन्तः ।
तत्पुरो नवघनेन विलासं
विद्युतां दधुर् अमूर् व्रजवध्वः
preyasā saha navīna-tamāla-
śyāmalena vipinaṁ praviśantaḥ |
tat-puro nava-ghanena vilāsaṁ
vidyutāṁ dadhur amūr vraja-vadhvaḥ
चैतन्यचरितामृत महाकाव्य 9.3श्लोक खोलें