- अक्षर प्रति पाद
- 12
- प्रकार
- अर्धसमवृत्त — अर्ध भिन्न
- गण
- na na ra ya / na ja ja ra ga
विषम पाद 12 अक्षर के, सम पाद 13 अक्षर के: दोनों अर्ध भिन्न हैं।
लक्षण
1⏑⏑⏑⏑⏑⏑–⏑–⏑––
2⏑⏑⏑⏑–⏑⏑–⏑–⏑––
3⏑⏑⏑⏑⏑⏑–⏑–⏑––
4⏑⏑⏑⏑–⏑⏑–⏑–⏑––
चिह्न कैसे पढ़ें
- ⏑लघु — छोटा अक्षरएक मात्रा। छोटा और हल्का बोला जाता है।
- –गुरु — दीर्घ अक्षरदो मात्राएँ: लघु से ठीक दुगुना खिंचता है। पंक्ति में उस पर हल्की छाया भी रहती है।
- पाद-सीमाश्लोक चार चरणों — पादों — में बँटा होता है। सीमा पर छोटा विराम।
- यतिलम्बे पाद के भीतर साँस लेने का स्थान। छोटी और हल्की रेखा।
उदाहरण
इति मतिरुपकल्पिता वितृष्णा भगवति सात्वतपुङ्गवे विभूम्नि
स्वसुखम् उपगते क्वचिद्विहर्तुं प्रकृतिम् उपेयुषि यद्भवप्रवाहः
iti matirupakalpitā vitṛṣṇā bhagavati sātvatapuṅgave vibhūmni
svasukham upagate kvacidvihartuṃ prakṛtim upeyuṣi yadbhavapravāhaḥ
श्रीमद्भागवतम् 1.9.32श्लोक खोलें