- अक्षर प्रति पाद
- 13
- प्रकार
- समवृत्त — चारों पाद समान
- गण
- ma na ja ra ga
- यति अक्षर के बाद
- 3
चार पाद, प्रत्येक 13 अक्षर का; चारों एक-से बने हैं।
लक्षण
1–––⏑⏑⏑⏑–⏑–⏑––
2–––⏑⏑⏑⏑–⏑–⏑––
3–––⏑⏑⏑⏑–⏑–⏑––
4–––⏑⏑⏑⏑–⏑–⏑––
चिह्न कैसे पढ़ें
- ⏑लघु — छोटा अक्षरएक मात्रा। छोटा और हल्का बोला जाता है।
- –गुरु — दीर्घ अक्षरदो मात्राएँ: लघु से ठीक दुगुना खिंचता है। पंक्ति में उस पर हल्की छाया भी रहती है।
- पाद-सीमाश्लोक चार चरणों — पादों — में बँटा होता है। सीमा पर छोटा विराम।
- यतिलम्बे पाद के भीतर साँस लेने का स्थान। छोटी और हल्की रेखा।
उदाहरण
यज्ञो ऽयं तव यजनाय केन सृष्टो विध्वस्तः पशुपतिनाद्य दक्ष-कोपात्
तं नस् त्वं शव-शयनाभ-शान्त-मेधं यज्ञात्मन् नलिन-रुचा दृशा पुनीहि
yajño 'yaṃ tava yajanāya kena sṛṣṭo vidhvastaḥ paśupatinādya dakṣa-kopāt
taṃ nas tvaṃ śava-śayanābha-śānta-medhaṃ yajñātman nalina-rucā dṛśā punīhi
श्रीमद्भागवतम् 4.7.33श्लोक खोलें