- अक्षर प्रति पाद
- 19
- प्रकार
- समवृत्त — चारों पाद समान
- गण
- ma sa ja sa ta ta ga
- यति अक्षर के बाद
- 12
चार पाद, प्रत्येक 19 अक्षर का; चारों एक-से बने हैं।
लक्षण
1–––⏑⏑–⏑–⏑⏑⏑–––⏑––⏑–
2–––⏑⏑–⏑–⏑⏑⏑–––⏑––⏑–
3–––⏑⏑–⏑–⏑⏑⏑–––⏑––⏑–
4–––⏑⏑–⏑–⏑⏑⏑–––⏑––⏑–
चिह्न कैसे पढ़ें
- ⏑लघु — छोटा अक्षरएक मात्रा। छोटा और हल्का बोला जाता है।
- –गुरु — दीर्घ अक्षरदो मात्राएँ: लघु से ठीक दुगुना खिंचता है। पंक्ति में उस पर हल्की छाया भी रहती है।
- पाद-सीमाश्लोक चार चरणों — पादों — में बँटा होता है। सीमा पर छोटा विराम।
- यतिलम्बे पाद के भीतर साँस लेने का स्थान। छोटी और हल्की रेखा।
उदाहरण
जन्माद्यस्य यतो ऽन्वयादितरतश्चार्थेष्वभिज्ञः स्वराट्
तेने ब्रह्म हृदा य आदिकवये मुह्यन्ति यत् सूरयः
तेजोवारिमृदां यथा विनिमयो यत्र त्रिसर्गो ऽमृषा
धाम्ना स्वेन सदा निरस्तकुहकं सत्यं परं धीमहि
janmādyasya yato 'nvayāditarataścārtheṣvabhijñaḥ svarāṭ
tene brahma hṛdā ya ādikavaye muhyanti yat sūrayaḥ
tejovārimṛdāṃ yathā vinimayo yatra trisargo 'mṛṣā
dhāmnā svena sadā nirastakuhakaṃ satyaṃ paraṃ dhīmahi
श्रीमद्भागवतम् 1.1.1श्लोक खोलें