- अक्षर प्रति पाद
- 17
- प्रकार
- समवृत्त — चारों पाद समान
- गण
- na sa ma ra sa la ga
- यति अक्षर के बाद
- 6 · 10
चार पाद, प्रत्येक 17 अक्षर का; चारों एक-से बने हैं।
लक्षण
1⏑⏑⏑⏑⏑–––––⏑–⏑⏑–⏑–
2⏑⏑⏑⏑⏑–––––⏑–⏑⏑–⏑–
3⏑⏑⏑⏑⏑–––––⏑–⏑⏑–⏑–
4⏑⏑⏑⏑⏑–––––⏑–⏑⏑–⏑–
चिह्न कैसे पढ़ें
- ⏑लघु — छोटा अक्षरएक मात्रा। छोटा और हल्का बोला जाता है।
- –गुरु — दीर्घ अक्षरदो मात्राएँ: लघु से ठीक दुगुना खिंचता है। पंक्ति में उस पर हल्की छाया भी रहती है।
- पाद-सीमाश्लोक चार चरणों — पादों — में बँटा होता है। सीमा पर छोटा विराम।
- यतिलम्बे पाद के भीतर साँस लेने का स्थान। छोटी और हल्की रेखा।
उदाहरण
मुखशशिसमुद्गीर्णैः फेनैर् हसन्न् इव शारदं
सततविजितं लक्ष्म्या लक्ष्म्याकुलं हिमदीधितिम् ।
पुलकपटलैर् अत्युद्भिन्नैः सुमेरुम् इवोद्गता
ङ्कुरशतपरिच्छेदातीतः स एष विराजते
mukha-śaśi-samudgīrṇaiḥ phenair hasann iva śāradaṁ
satata-vijitaṁ lakṣmyā lakṣmyākulaṁ hima-dīdhitim |
pulaka-paṭalair atyudbhinnaiḥ sumerum ivodgatā-
ṅkura-śata-paricchedātītaḥ sa eṣa virājate
चैतन्यचरितामृत महाकाव्य 16.21श्लोक खोलें