भगवद्गीता · 17.10
॥
देवनागरी
यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं च यत् ।
उच्छिष्टमपि चामेध्यं भोजनं तामसप्रियम् ॥
लिप्यंतरण (IAST)
yāta-yāmaṁ gata-rasaṁ pūti paryuṣitaṁ ca yat |
ucchiṣṭam api cāmedhyaṁ bhojanaṁ tāmasa-priyam ||
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
यातयामम्yāta-yāmam[खाने से] तीन घंटे से अधिक पहले बनाया हुआ।
गतरसम्gata-rasamस्वादहीन (गत-रसम्)।
पूतिpūtiदुर्गन्धयुक्त, सड़ता हुआ।
पर्युषितम् च यत्paryuṣitaṁ ca yatऔर बासी, एक दिन पुराना।
उच्छिष्टम् अपि चucchiṣṭam api caतथा जूठन।
अमेध्यम्amedhyamअपवित्र [यज्ञ के अयोग्य]।
भोजनम्bhojanamभोजन।
तामसप्रियम्tāmasa-priyamजो तमस् गुण (तामस) वाले लोगों को प्रिय (प्रियम्) है।
अनुवाद
“जो भोजन खाने से तीन घंटे से अधिक पहले बना हो, स्वादहीन, दुर्गन्धयुक्त, बासी हो, तथा जूठन और अपवित्र वस्तुएँ — ऐसा भोजन तमस् गुण में स्थित लोगों को प्रिय होता है।”
संस्करण
6ff15e51d2ad · प्रकाशित 2 जुल॰ 2026, 12:00:00 pm UTC
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