पुस्तकालयभगवद्गीता
vaishnava

भगवद्गीता

कुरुक्षेत्र के मैदान पर भगवान कृष्ण और अर्जुन का संवाद — आत्मा, धर्म, योग और भक्ति पर वैदिक ज्ञान का सार। संस्कृत, लिप्यंतरण, शब्दार्थ और साहित्यिक अनुवाद।

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Бхагавад-гита

1अध्याय 1 — अर्जुन-विषाद-योग (अर्जुन के विषाद का योग)45 श्लोक
4अध्याय 4 — ज्ञान-कर्म-संन्यास-योग (दिव्य ज्ञान, कर्म और संन्यास का योग)42 श्लोक
5अध्याय 5 — कर्म-संन्यास-योग (भौतिक कर्म के त्याग का योग)26 श्लोक
6अध्याय 6 — आत्म-संयम-योग (आत्म-नियंत्रण का योग)42 श्लोक
7अध्याय 7 — ज्ञान-विज्ञान-योग (ज्ञान और उसकी उपलब्धि का योग)30 श्लोक
8अध्याय 8 — अक्षर-ब्रह्म-योग (अविनाशी ब्रह्म का योग)26 श्लोक
9अध्याय 9 — राज-विद्या-राज-गुह्य-योग (राजविद्या और राजरहस्य का योग)33 श्लोक
10अध्याय 10 — विभूति-योग (दिव्य विभूतियों का योग)40 श्लोक
12अध्याय 12 — भक्ति-योग (भक्ति सेवा का योग)16 श्लोक
13अध्याय 13 — क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ-विभाग-योग (क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के भेद का योग)32 श्लोक
14अध्याय 14 — गुण-त्रय-विभाग-योग (प्रकृति के तीन गुणों के भेद का योग)25 श्लोक
15अध्याय 15 — पुरुषोत्तम-योग (परम पुरुष का योग)19 श्लोक
16अध्याय 16 — दैवासुर-संपद-विभाग-योग (दैवी और आसुरी गुणों के भेद का योग)17 श्लोक
17अध्याय 17 — श्रद्धा-त्रय-विभाग-योग (तीन प्रकार की श्रद्धा के भेद का योग)26 श्लोक