भगवद्गीता · 7.6
॥
देवनागरी
एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय ।
अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा ॥
लिप्यंतरण (IAST)
etad-yonīni bhūtāni sarvāṇīty upadhāraya |
ahaṁ kṛtsnasya jagataḥ prabhavaḥ pralayas tathā ||
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
एतद्योनीनिetat-yonīniवे, जिनकी योनि (योनि) — ये दोनों [प्रकृतियाँ] हैं।
भूतानिbhūtāniप्राणी।
सर्वाणिsarvāṇiसब।
इति उपधारयiti upadhārayaऐसा समझो, जान लो।
अहम्ahamमैं।
कृत्स्नस्यkṛtsnasyaसम्पूर्ण की।
जगतःjagataḥजगत् की, सृष्टि की।
प्रभवःprabhavaḥस्रोत, उत्पत्ति।
प्रलयःpralayaḥऔर प्रलय, संहार।
तथाtathāतथा।
अनुवाद
“जान लो कि समस्त सृजित प्राणी इन्हीं दोनों प्रकृतियों से उत्पन्न होते हैं। और मैं ही इस सम्पूर्ण जगत् की उत्पत्ति और प्रलय दोनों का स्रोत हूँ।”
संस्करण
904ba00887de · प्रकाशित 2 जुल॰ 2026, 12:00:00 pm UTC
उपलब्ध भाषाएँRUENESHIZHश्लोक बदलें इन कुंजियों से