भगवद्गीता
ज्ञान-विज्ञान-योग (ज्ञान और उसकी उपलब्धि का योग)7.10
276 / 655
भगवद्गीता · 7.10
देवनागरी

बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि पार्थ सनातनम् ।
बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् ॥

लिप्यंतरण (IAST)

bījaṁ māṁ sarva-bhūtānāṁ viddhi pārtha sanātanam |
buddhir buddhimatām asmi tejas tejasvinām aham ||

शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
बीजम्bījamबीज।
माम्māmमुझे।
सर्वभूतानाम्sarva-bhūtānāmसमस्त प्राणियों का।
विद्धिviddhiजान लो।
पार्थpārthaहे पार्थ!
सनातनम्sanātanamसनातन, आदि।
बुद्धिःbuddhiḥबुद्धि, विवेक।
बुद्धिमताम्buddhi-matāmबुद्धिमानों की।
अस्मिasmiमैं हूँ।
तेजःtejaḥतेज, पराक्रम, दीप्ति।
तेजस्विनाम्tejasvināmतेजस्वियों का।
अहम्ahamमैं।
अनुवाद

“हे पार्थ, जान लो कि मैं समस्त प्राणियों का सनातन बीज हूँ। मैं बुद्धिमानों की बुद्धि हूँ और तेजस्वियों का तेज हूँ।”

संस्करण

b9201fbf699c · प्रकाशित 2 जुल॰ 2026, 12:00:00 pm UTC

उपलब्ध भाषाएँRUENESHIZH

श्लोक बदलें इन कुंजियों से