भगवद्गीता
ज्ञान-विज्ञान-योग (ज्ञान और उसकी उपलब्धि का योग)7.26
292 / 655
भगवद्गीता · 7.26
देवनागरी

वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन ।
भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन ॥

लिप्यंतरण (IAST)

vedāhaṁ samatītāni vartamānāni cārjuna |
bhaviṣyāṇi ca bhūtāni māṁ tu veda na kaścana ||

शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
वेद अहम्veda ahamमैं जानता हूँ।
समतीतानिsamatītāniबीते हुए, भूतकाल को।
वर्तमानानि चvartamānāni caऔर वर्तमान को।
अर्जुनarjunaहे अर्जुन!
भविष्याणि चbhaviṣyāṇi caऔर भविष्य को।
भूतानिbhūtāni[समस्त] प्राणियों के।
माम् तुmām tuपरन्तु मुझे।
वेदvedaजानता है।
न कश्चनna kaścanaकोई नहीं।
अनुवाद

“हे अर्जुन, मैं समस्त प्राणियों के भूत, वर्तमान और भविष्य को जानता हूँ। परन्तु मुझे कोई नहीं जानता।”

संस्करण

788a7169ae93 · प्रकाशित 2 जुल॰ 2026, 12:00:00 pm UTC

उपलब्ध भाषाएँRUENESHIZH

श्लोक बदलें इन कुंजियों से