भगवद्गीता · 16.9
॥
देवनागरी
एतां दृष्टिमवष्टभ्य नष्टात्मानोऽल्पबुद्धयः ।
प्रभवन्त्युग्रकर्माणः क्षयाय जगतोऽहिताः ॥
लिप्यंतरण (IAST)
etāṁ dṛṣṭim avaṣṭabhya naṣṭātmāno 'lpa-buddhayaḥ |
prabhavanty ugra-karmāṇaḥ kṣayāya jagato 'hitāḥ ||
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
एताम् दृष्टिम्etām dṛṣṭimइस मत, इस दर्शन का।
अवष्टभ्यavaṣṭabhyaअपनाकर, आश्रय लेकर।
नष्टात्मानःnaṣṭa-ātmānaḥवे जिन्होंने अपनी आत्मा (आत्मानः) खो दी (नष्ट) है।
अल्पबुद्धयःalpa-buddhayaḥवे जिनकी बुद्धि (बुद्धयः) अल्प (अल्प) है।
प्रभवन्तिprabhavantiवे प्रकट होते हैं, वे जन्म लेते हैं।
उग्रकर्माणःugra-karmāṇaḥवे जिनके कर्म (कर्माणः) घोर (उग्र) हैं।
क्षयायkṣayāyaविनाश के लिए।
जगतःjagataḥसंसार के।
अहिताःahitāḥशत्रु, अहितकारी।
अनुवाद
“ऐसे मत का आश्रय लेकर, अल्पबुद्धि वाली ये विनष्ट आत्माएँ संसार के विनाश के लिए घोर, शत्रुतापूर्ण कर्म करने हेतु जन्म लेती हैं।”
संस्करण
712b6dbeb26a · प्रकाशित 2 जुल॰ 2026, 12:00:00 pm UTC
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