भगवद्गीता · 16.5
॥
देवनागरी
दैवी सम्पद्विमोक्षाय निबन्धायासुरी मता ।
मा शुचः सम्पदं दैवीमभिजातोऽसि पाण्डव ॥
लिप्यंतरण (IAST)
daivī sampad vimokṣāya nibandhāyāsurī matā |
mā śucaḥ sampadaṁ daivīm abhijāto 'si pāṇḍava ||
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
दैवी सम्पत्daivī sampatदैवी गुण।
विमोक्षायvimokṣāyaमोक्ष के लिए।
निबन्धायnibandhāyaबंधन के लिए।
आसुरीāsurīआसुरी।
मताmatāमाने जाते हैं।
मा शुचःmā śucaḥशोक मत करो।
सम्पदम् दैवीम्sampadam daivīmदैवी गुणों के साथ।
अभिजातः असिabhijātaḥ asiतुमने जन्म लिया है।
पाण्डवpāṇḍavaहे पाण्डुपुत्र!
अनुवाद
“दैवी गुण मोक्ष की ओर ले जाते हैं, जबकि आसुरी गुण बंधन की ओर। परन्तु शोक मत करो, हे पाण्डुपुत्र, क्योंकि तुमने दैवी स्वभाव के साथ जन्म लिया है।”
संस्करण
b8608cfa9e61 · प्रकाशित 2 जुल॰ 2026, 12:00:00 pm UTC
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