भगवद्गीता
अक्षर-ब्रह्म-योग (अविनाशी ब्रह्म का योग)8.7
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भगवद्गीता · 8.7
देवनागरी

तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च ।
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयः ॥

लिप्यंतरण (IAST)

tasmāt sarveṣu kāleṣu mām anusmara yudhya ca |
mayy arpita-mano-buddhir mām evaiṣyasy asaṁśayaḥ ||

शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
तस्मात्tasmātइसलिए।
सर्वेषु कालेषुsarveṣu kāleṣuसभी समयों में, सदा।
माम्māmमेरा।
अनुस्मरanusmaraस्मरण करो, ध्यान करो।
युध्य चyudhya caऔर युद्ध करो।
मयि अर्पितमनोबुद्धिःmayi arpita-manaḥ-buddhiḥजिसने अपने मन (मनः) और बुद्धि (बुद्धि) को मुझमें (मयि) अर्पित (अर्पित) किया है।
माम् एव एष्यसिmām eva eṣyasiतुम मुझे ही प्राप्त होगे।
असंशयःasaṁśayaḥनिःसंदेह।
अनुवाद

“इसलिए सदा मेरा स्मरण करो और साथ ही युद्ध भी करो। अपने मन और बुद्धि को मुझे अर्पित करके तुम निःसंदेह मुझे ही प्राप्त होगे।”

संस्करण

732f69cbb2ef · प्रकाशित 2 जुल॰ 2026, 12:00:00 pm UTC

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