भगवद्गीता · 13.19
॥
देवनागरी
इति क्षेत्रं तथा ज्ञानं ज्ञेयं चोक्तं समासतः ।
मद्भक्त एतद्विज्ञाय मद्भावायोपपद्यते ॥
लिप्यंतरण (IAST)
iti kṣetraṁ tathā jñānaṁ jñeyaṁ coktaṁ samāsataḥ |
mad-bhakta etad vijñāya mad-bhāvāyopapadyate ||
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
इतिitiइस प्रकार।
क्षेत्रम् तथा ज्ञानम्kṣetram tathā jñānamक्षेत्र (क्षेत्र) तथा ज्ञान (ज्ञान)।
ज्ञेयम् चjñeyam caऔर ज्ञेय (ज्ञान का विषय)।
उक्तम्uktamबताया गया।
समासतःsamāsataḥसंक्षेप में।
मद्भक्तःmad-bhaktaḥमेरा भक्त।
एतत् विज्ञायetat vijñāyaइसे जानकर (विज्ञाय)।
मद्भावायmat-bhāvāyaमेरे स्वरूप, मेरी सत्ता की स्थिति की ओर।
उपपद्यतेupapadyateवह प्राप्त करता है, वह योग्य बनता है।
अनुवाद
“इस प्रकार मैंने तुम्हें संक्षेप में बताया कि कर्मक्षेत्र क्या है, ज्ञान क्या है और ज्ञेय क्या है। मेरा भक्त, यह सब समझकर, मेरे स्वरूप को प्राप्त करता है।”
संस्करण
6633cf82ba4e · प्रकाशित 2 जुल॰ 2026, 12:00:00 pm UTC
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