भगवद्गीता · 10.15
॥
देवनागरी
स्वयमेवात्मनात्मानं वेत्थ त्वं पुरुषोत्तम ।
भूतभावन भूतेश देवदेव जगत्पते ॥
लिप्यंतरण (IAST)
svayam evātmanātmānaṁ vettha tvaṁ puruṣottama |
bhūta-bhāvana bhūteśa deva-deva jagat-pate ||
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
स्वयम् एवsvayam evaसचमुच आप स्वयं।
आत्मनाātmanāअपने द्वारा, अपनी शक्ति से।
आत्मानम्ātmānamस्वयं को।
वेत्थvetthaआप जानते हैं।
त्वम्tvamआप।
पुरुषोत्तमpuruṣottamaहे पुरुषोत्तम! (परम पुरुष)।
भूतभावनbhūta-bhāvanaहे समस्त प्राणियों के स्रोत!
भूतेशbhūta-īśaहे समस्त प्राणियों के स्वामी!
देवदेवdeva-devaहे देवों के देव!
जगत्पतेjagat-pateहे जगत् के अधिपति!
अनुवाद
“हे पुरुषोत्तम, समस्त प्राणियों के स्रोत, समस्त सृष्टि के स्वामी, देवों के देव और जगत् के अधिपति! सचमुच केवल आप ही अपनी अन्तरंगा शक्ति से स्वयं को जानते हैं।”
संस्करण
088b2bdc37fe · प्रकाशित 2 जुल॰ 2026, 12:00:00 pm UTC
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