भगवद्गीता · 2.35
॥
देवनागरी
भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः ।
येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम् ॥
लिप्यंतरण (IAST)
bhayād raṇād uparataṁ maṁsyante tvāṁ mahārathāḥ |
yeṣāṁ ca tvaṁ bahumato bhūtvā yāsyasi lāghavam ||
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
भयात्bhayātभय से।
रणात्raṇātयुद्ध से।
उपरतम्uparatamविरत हुआ, हटा हुआ, भागा हुआ।
मंस्यन्तेmaṁsyanteवे समझेंगे, वे मानेंगे।
त्वाम्tvāmतुझे।
महारथाःmahārathāḥमहान् रथी योद्धा (महारथी)।
येषाम्yeṣāmजिनके लिए, जिनकी दृष्टि में।
चcaऔर।
त्वम्tvamतू।
बहुमतःbahumataḥअत्यन्त सम्मानित था, ऊँचा माना जाता था।
भूत्वाbhūtvāहोकर।
यास्यसिyāsyasiतू हो जाएगा, तू पहुँच जाएगा।
लाघवम्lāghavamतुच्छ, नगण्य, हल्का।
अनुवाद
“महान् रथी योद्धा यह समझेंगे कि तू भय के कारण युद्धभूमि से भाग गया। और जो सदा तेरा बहुत आदर करते थे, वे तुझे तुच्छ समझने लगेंगे।”
संस्करण
e48965f947e7 · प्रकाशित 2 जुल॰ 2026, 12:00:00 pm UTC
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