भगवद्गीता · 9.32
॥
देवनागरी
मां हि पार्थ व्यपाश्रित्य येऽपि स्युः पापयोनयः ।
स्त्रियो वैश्यास्तथा शूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम् ॥
लिप्यंतरण (IAST)
māṁ hi pārtha vyapāśritya ye 'pi syuḥ pāpa-yonayaḥ |
striyo vaiśyās tathā śūdrās te 'pi yānti parāṁ gatim ||
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
माम् हिmām hiक्योंकि मेरी।
पार्थpārthaहे पार्थ!
व्यपाश्रित्यvyapāśrityaशरण लेकर।
ये अपि स्युःye api syuḥवे चाहे जो भी हों।
पापयोनयःpāpa-yonayaḥपाप (पाप) योनियों (योनयः) में जन्मे।
स्त्रियःstriyaḥस्त्रियाँ।
वैश्याःvaiśyāḥवैश्य (व्यापारी)।
तथा शूद्राःtathā śūdrāḥतथा शूद्र (श्रमिक)।
ते अपिte apiवे भी।
यान्तिyāntiवे प्राप्त करते हैं।
पराम् गतिम्parām gatimपरम गति को।
अनुवाद
“हे पार्थ, जो कोई भी मेरी शरण लेता है — चाहे वह नीच कुल में जन्मा हो, स्त्री हो, वैश्य हो या शूद्र — वह भी परम गति को प्राप्त करता है।”
संस्करण
b229a9e6fe77 · प्रकाशित 2 जुल॰ 2026, 12:00:00 pm UTC
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