भगवद्गीता · 11.3
॥
देवनागरी
एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वर ।
द्रष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम ॥
लिप्यंतरण (IAST)
evam etad yathāttha tvam ātmānaṁ parameśvara |
draṣṭum icchāmi te rūpam aiśvaraṁ puruṣottama ||
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
एवम् एतत्evam etatठीक ऐसा ही।
यथा आत्थyathā ātthaजैसा आपने कहा।
त्वम् आत्मानम्tvam ātmānamआपने स्वयं को।
परमेश्वरparama-īśvaraहे परमेश्वर!
द्रष्टुम् इच्छामिdraṣṭum icchāmiमैं देखना (द्रष्टुम्) चाहता हूँ (इच्छामि)।
ते रूपम्te rūpamआपके रूप को।
ऐश्वरम्aiśvaramदिव्य, ऐश्वर्यमय।
पुरुषोत्तमpuruṣottamaहे पुरुषोत्तम!
अनुवाद
“हे परमेश्वर, सब कुछ ठीक वैसा ही है जैसा आपने अपने विषय में कहा है। अब, हे पुरुषोत्तम, मैं आपके उस दिव्य, ऐश्वर्यमय रूप को देखना चाहता हूँ।”
संस्करण
691d0fdcd28c · प्रकाशित 2 जुल॰ 2026, 12:00:00 pm UTC
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