भगवद्गीता · 1.5
॥
देवनागरी
धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान् ।
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः ॥
लिप्यंतरण (IAST)
dhṛṣṭaketuś cekitānaḥ kāśirājaś ca vīryavān |
purujit kuntibhojaś ca śaibyaś ca narapuṅgavaḥ ||
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
धृष्टकेतुःdhṛṣṭaketuḥधृष्टकेतु (चेदि के राजा, शिशुपाल के पुत्र)।
चेकितानःcekitānaḥचेकितान (वृष्णिवंशीय योद्धा, कृष्ण के सम्बन्धी)।
काशिराजःkāśi-rājaḥकाशीराज, काशी (वाराणसी) के राजा।
चcaऔर।
वीर्यवान्vīryavānपराक्रमी, बलशाली, वीर।
पुरुजित्purujitपुरुजित (कुन्तिभोज के भाई)।
कुन्तिभोजःkuntibhojaḥकुन्तिभोज (पाण्डवों की माता कुन्ती के पालक पिता)।
चcaऔर।
शैब्यःśaibyaḥशैब्य (शिबि वंश के राजा)।
चcaऔर।
नरपुङ्गवःnara-puṅgavaḥनरश्रेष्ठ, मनुष्यों में श्रेष्ठ (शब्दशः “मनुष्यों में वृषभ”)।
अनुवाद
“और यहाँ धृष्टकेतु, चेकितान तथा काशी के पराक्रमी राजा भी हैं। और पुरुजित, कुन्तिभोज तथा शैब्य — जो नरश्रेष्ठ हैं।”
संस्करण
848fed48530b · प्रकाशित 2 जुल॰ 2026, 12:00:00 pm UTC
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