कृष्णाह्निककौमुदी
Midday4.109कवि कर्णपूर
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कृष्णाह्निककौमुदी · 4.109
॥
देवनागरी

साध्व् अमन्यत न ताम् अनुकम्पाम्अस्य सा निजगदे च सकम्पा ।मुञ्च मुञ्च शठ माम् अपि पिञ्छापीड नात्र कुसुमे मम वाञ्छा ॥109॥

लिप्यंतरण (IAST)

sādhv amanyata na tām anukampāmasya sā nijagade ca sa-kampā |muñca muñca śaṭha mām api piñchā-pīḍa nātra kusume mama vāñchā ||109||

Svāgatā · 11+11+11+11

शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
साध्व् अमन्यत न ताम् अनुकम्पाम्sādhv amanyata na tām anukampāmне одобрила той его помощи
अस्य सा निजगदे च स-कम्पाasya sā nijagade ca sa-kampāи сказала она, дрожа
मुञ्च मुञ्च शठmuñca muñca śaṭhaпусти, пусти, обманщик
माम् अपि पिञ्छा-पीडmām api piñchā-pīḍaменя, увенчанный пером
नात्र कुसुमे मम वाञ्छाnātra kusume mama vāñchāне хочу я этого цветка
अनुवाद

Она не одобрила его помощи и сказала, дрожа: «Пусти, пусти меня, обманщик, увенчанный пером! Не хочу я этого цветка».

संस्करण

6c0516e63399 · प्रकाशित 29 सित॰ 2026, 5:19:56 pm UTC

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