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चैतन्यचन्द्रोदय नाटक · 6.76
देवनागरी

गोपीनाथाचार्यः—देव, मध्याह्नो जातः । तदुत्तरकरणीयाय सज्जीभवन्तु श्रीचरणाः ।
सर्वे—एवमेव । (इति निष्क्रान्ताः ।)

लिप्यंतरण (IAST)

gopīnāthācāryaḥ—deva, madhyāhno jātaḥ | taduttarakaraṇīyāya sajjībhavantu śrīcaraṇāḥ |
sarve—evameva | (iti niṣkrāntāḥ |)

अनुवाद

Гопинатха Ачарья. Господи, настал полдень. Пусть досточтимые стопы готовятся к тому, что следует дальше.

Все. Так и есть. (Уходят.)

अध्याय का पुष्पिका-वाक्य

इति सार्वभौमानुग्रहो नाम षष्ठोऽङ्कः ।

संस्करण

d7f442d98bb8 · प्रकाशित 14 सित॰ 2026, 2:00:00 pm UTC

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