पुस्तकालयविलापकुसुमाञ्जलि
vaishnava
विलापकुसुमाञ्जलि
«विलापकुसुमाञ्जलि» — रघुनाथदास गोस्वामी के १०४ श्लोक, उनकी «स्तवावली» का प्रथम काव्य। मञ्जरी — राधा की किशोरी दासी — के रूप में वे केवल एक वस्तु माँगते हैं: राधा की सेवा। राधा की दिनचर्या का प्रत्येक दृश्य «कब मुझे…» की प्रार्थना बन जाता है।
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