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हरिभक्तिविलासः · 1.151
॥
देवनागरी
मन्त्रराज इति प्रोक्तः सर्वेषाम् उत्तमोत्तमः ।
दैनन्दिनं तु दुरितं पक्षमासर्तुवर्षजम् ॥151॥
लिप्यंतरण (IAST)
mantra-rāja iti proktaḥ sarveṣām uttamottamaḥ |
dainandinaṁ tu duritaṁ pakṣa-māsa-rtu-varṣajam ||151||
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
मन्त्र-राजmantra-rājaцарь мантр —
इतिitiтак
प्रोक्तःproktaḥназванная,
सर्वेषाम्sarveṣāmиз всех
उत्तमोत्तमःuttamottamaḥвысочайшая;
दैनन्दिनंdainandinaṁежедневный
तुtuже
दुरितंduritaṁгрех,
पक्ष-मास-र्तु-वर्षजम्pakṣa-māsa-rtu-varṣajamнакопленный за полмесяца, месяц, сезон и год,
अनुवाद
её зовут царём мантр, она высочайшая из всех. Грехи дня, половины месяца, месяца, сезона и года
संस्करण
6ee02270ca34 · प्रकाशित 24 सित॰ 2026, 11:34:51 am UTC
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