पुस्तकालयचैतन्यचन्द्रोदय नाटकचतुर्थ अंक: संन्यासपरिग्रह
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चैतन्यचन्द्रोदय नाटक

चैतन्यचन्द्रोदय दस अंकों का संस्कृत नाटक है, जिसका विषय श्री चैतन्य महाप्रभु का जीवन है। इसके रचयिता कविकर्णपूर (जन्म 1524) महाप्रभु के पार्षद शिवानन्द सेन के पुत्र थे और बालपन में उन्होंने महाप्रभु को स्वयं देखा था — अतः यह परवर्ती कथा नहीं, प्रथम पीढ़ी का साक्ष्य है। नाटक पुरी में आरम्भ होता है, उस गुण्डिचा यात्रा से जो महाप्रभु के बिना हो रही है, और दस अंकों में नवद्वीप से संन्यास-ग्रहण, सार्वभौम और प्रतापरुद्र पर कृपा, तीर्थाटन तथा महामहोत्सव तक ले जाता है। मनुष्य पात्रों के साथ यहाँ मूर्त भाव भी पात्र हैं: कलि और अधर्म, भक्ति, वैराग्य, विवेक। यह पुराण नहीं है — संख्यांकित श्लोकों के बीच गद्य संवाद और रंग-निर्देश आते हैं — इसलिए यहाँ पठन-इकाई संवाद या श्लोक है, और मुद्रित संस्करण का श्लोक-क्रमांक अलग से रखा गया है। पाठ काव्यमाला संख्या 87 (बम्बई, 1917) के पृष्ठ-चित्रों से मिलाकर शुद्ध किया गया है; सम्पादक की पादटिप्पणियाँ इस संग्रह में सम्मिलित नहीं हैं।

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चतुर्थ अंक: संन्यासपरिग्रह