ललितमाधवम्
Act Seven: The Meeting in New Vṛndāvana7.52रूप गोस्वामी
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ललितमाधवम् · 7.52
॥

Kṛṣṇa

देवनागरी

श्रीकृष्णः (परामृश्य निश्वसन्) : कथं नामधेयवर्णानाम् आकर्णनाद् एव सर्वानुसन्धानविधुरोऽस्मि । (इति परिक्रम्य)

लिप्यंतरण (IAST)

śrī-kṛṣṇaḥ (parāmṛśya niśvasan) : kathaṁ nāmadheya-varṇānām ākarṇanād eva sarvānusandhāna-vidhuro’smi | (iti parikramya)

अनुवाद

Шри Кришна (опомнившись, вздыхая): Как же так — лишь услышав слоги её имени, я теряю всякое разумение! (Идёт.)

संस्करण

ba4aa9e03b2b · प्रकाशित 24 सित॰ 2026, 7:21:46 am UTC

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