आनन्दवृन्दावनचम्पूः
The flowering of first love8.9कवि कर्णपूर
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आनन्दवृन्दावनचम्पूः · 8.9
॥
देवनागरी

यस्तु अविपक्वमरसभावितं तासामन्तरं वंशमिव घुणः सन्ततमेव निकृन्तति ॥9॥

लिप्यंतरण (IAST)

yastu avipakvamarasabhāvitaṁ tāsāmantaraṁ vaṁśamiva ghuṇaḥ santatameva nikṛntati ||9||

अनुवाद

Оно, ещё не созрев и не дав вкуса, непрестанно точило им сердце, как червь — бамбук.

संस्करण

e963694b5f79 · प्रकाशित 28 सित॰ 2026, 11:05:28 pm UTC

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