पुस्तकालयब्रह्मसंहिता
vaishnava

ब्रह्मसंहिता

ब्रह्मसंहिता वह स्तोत्र है जिससे सृष्टिकर्ता ब्रह्मा गोविन्द के धाम का दर्शन करके उनकी स्तुति करते हैं। संहिता के सौ अध्यायों में से केवल पाँचवाँ अध्याय बचा है: श्री चैतन्य महाप्रभु ने 1512 में दक्षिण भारत के आदिकेशव मन्दिर में उसकी पाण्डुलिपि पाई और बंगाल ले आए, और तभी से वह स्वतन्त्र ग्रन्थ के रूप में पढ़ा जाता है। बासठ श्लोक: गोकुल की रचना, भौतिक जगत् की उत्पत्ति, अन्धकार में ब्रह्मा का प्राकट्य और उन्हें दिया गया मन्त्र, तथा फिर एक ही टेक वाले अट्ठाईस श्लोक — गोविन्दम् आदिपुरुषं तमहं भजामि। यहाँ शब्दार्थ, साहित्यिक अनुवाद और टिप्पणी सहित मूल पाठ दिया गया है; जीव गोस्वामी की दिग्दर्शिनी टीका इस पुस्तक में सम्मिलित नहीं है।

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पञ्चम अध्याय