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हरिभक्तिविलासः · 13.514
॥
देवनागरी
अथ तत्र जयन्तीव्रते आवाहनमन्त्रः
एहि एहि जगन्नाथ वैकुण्ठ पुरुषोत्तम ।
परिवारगणोपेत लक्ष्म्या सह जगत्पते ॥514॥ इति ।
लिप्यंतरण (IAST)
atha tatra jayantī-vrate āvāhana-mantraḥ
ehi ehi jagannātha vaikuṇṭha puruṣottama |
parivāra-gaṇopeta lakṣmyā saha jagatpate ||514|| iti |
छन्द अज्ञात
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
एहिehiприди,
एहिehiприди,
जगन्नाथjagannāthaо Владыка мира,
वैकुण्ठvaikuṇṭhaо Вайкунтха,
पुरुषोत्तमpuruṣottamaо Высшая Личность,
परिवार-गणोपेतparivāra-gaṇopetaсо свитой,
लक्ष्म्याlakṣmyāс Лакшми
सहsahaвместе,
जगत्पतेjagatpateо Владыка мира
इतिiti— так сказано
अनुवाद
Мантра призывания для обета джаянти: „Приди, приди, о Владыка мира, Вайкунтха, Высшая Личность, вместе со свитой и с Лакшми, о Владыка вселенной!“
संस्करण
edd0270c77e1 · प्रकाशित 24 सित॰ 2026, 2:16:48 pm UTC
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