मथुरामाहात्म्यम्
Mathurā-māhātmya233रूप गोस्वामी
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मथुरामाहात्म्यम् · 233
॥
देवनागरी

गङ्गाशतगुणं प्रोक्तं
यत्र केशीनिपतितः ।
केश्याः शतगुणं प्रोक्तं
यत्र विश्रान्तितो हरिः ॥

लिप्यंतरण (IAST)

gaṅgā-śata-guṇaṁ proktaṁ
yatra keśī-nipatitaḥ |
keśyāḥ śata-guṇaṁ proktaṁ
yatra viśrāntito hariḥ ||

छन्द अज्ञात

शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
गङ्गाgaṅgāГанги
शतśataв сто
गुणंguṇaṁраз больше
प्रोक्तंproktaṁназвано
यत्रyatraгде
केशीkeśīКеши
निपतितःnipatitaḥпал;
केश्याःkeśyāḥКеши-(тиртхи)
शतśataв сто
गुणंguṇaṁраз больше
प्रोक्तंproktaṁназвано
यत्रyatraгде
विश्रान्तितोviśrāntitoотдохнул
हरिःhariḥХари.
अनुवाद

Место, где пал Кеши, названо в сто раз святее Ганги; а место, где отдохнул Хари, — в сто раз святее Кеши-тиртхи.

संस्करण

f5fd3c55e6f1 · प्रकाशित 24 सित॰ 2026, 2:01:08 am UTC

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