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वृन्दावनमहिमामृत · 11.36
॥
देवनागरी
अस्तु वा मास्तु वा वस्तु यद् वयं मृगयामहे ।वृन्दारण्ये न्यस्तम् एव स्वयम् अस्तं व्रजद्वपुः ॥11.36॥
लिप्यंतरण (IAST)
astu vā māstu vā vastu yad vayaṁ mṛgayāmahe |vṛndāraṇye nyastam eva svayam astaṁ vrajad-vapuḥ ||11.36||
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
अस्तु वा मास्तु वा वस्तुastu vā māstu vā vastuбудет или не будет то
यद् वयं मृगयामहेyad vayaṁ mṛgayāmaheчто мы ищем
वृन्दारण्ये न्यस्तम् एवvṛndāraṇye nyastam evaположенное во Вриндаване
स्वयम् अस्तं व्रजद्-वपुःsvayam astaṁ vrajad-vapuḥпусть само угаснет тело
अनुवाद
Будет или не будет то, что мы ищем, — пусть тело, положенное во Вриндаване, само угаснет здесь.
संस्करण
be893af2d8ce · प्रकाशित 30 सित॰ 2026, 12:48:49 am UTC
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