गोपालचम्पूः
The Fall of Kaṁsa2.5.77जीव गोस्वामी
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गोपालचम्पूः · 2.5.77
॥
देवनागरी

एवं प्रियसखीलेखं वाचकस्य बकीरिपोः ।
लुम्पत्कल्पस् तदा बाष्पः स्थैर्यकल्पम् अचीकॢपत् ॥77॥

लिप्यंतरण (IAST)

evaṁ priya-sakhī-lekhaṁ vācakasya bakī-ripoḥ |
lumpat-kalpas tadā bāṣpaḥ sthairya-kalpam acīkḷpat ||77||

Anuṣṭubh · pathyā · 8+8+8+8

शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
एवंevaṁтак
प्रिय-सखी-लेखंpriya-sakhī-lekhaṁписьмо милых подруг
वाचकस्यvācakasyaу читавшего
बकी-रिपोःbakī-ripoḥВрага Баки
लुम्पत्-कल्पस्lumpat-kalpasбудто смывающие
तदाtadāтогда
बाष्पःbāṣpaḥслёзы
स्थैर्य-कल्पम्sthairya-kalpamбудто неподвижным
अचीकॢपत्acīkḷpatсделали
अनुवाद

Когда Враг Баки читал это письмо милых подруг, слёзы, что едва не смыли его, заставили Его застыть.

संस्करण

73bcf642ae59 · प्रकाशित 25 सित॰ 2026, 2:28:45 am UTC

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