हरिभक्तिविलासः
Vilāsa 6: On Bathing the Lord6.228गोपाल भट्ट गोस्वामी
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हरिभक्तिविलासः · 6.228
॥
देवनागरी

विमुक्तः सर्वपापेभ्यो याति विष्णोः परं पदम् ॥228॥

लिप्यंतरण (IAST)

vimuktaḥ sarva-pāpebhyo yāti viṣṇoḥ paraṁ padam ||228||

शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
विमुक्तःvimuktaḥосвобождённый
सर्व-पापेभ्योsarva-pāpebhyoот всех грехов,
यातिyātiидёт
विष्णोःviṣṇoḥВишну
परंparaṁв высшую
पदम्padamобитель.
अनुवाद

освобождается от всех грехов и идёт в высшую обитель Вишну.

संस्करण

1749df7692de · प्रकाशित 24 सित॰ 2026, 11:34:51 am UTC

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