पुस्तकालयहंसदूत
vaishnava
हंसदूत
«हंसदूत» — रूप गोस्वामी का काव्य, शिखरिणी छन्द में १४२ श्लोक। कृष्ण व्रज छोड़कर मथुरा चले गये हैं; यमुना-तट पर राधा मूर्छित हो जाती हैं, और ललिता एक श्वेत हंस को सन्देश देकर मथुरा भेजती हैं। आधा काव्य मार्ग का वर्णन है, फिर राजनगरी में कृष्ण को पहचानने की रीति, और अन्त में स्वयं सन्देश।
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