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गोपालचम्पूः · 1.18.102
॥
देवनागरी
किन्तु—
यद्वद् उत्थापितस् तद्वत् कृष्णेनाद्रिः स रोपितः ।
दृष्टश् च सर्वलोकेन प्रकारस् तु न लक्षितः ॥102॥
लिप्यंतरण (IAST)
kintu—
yadvad utthāpitas tadvat kṛṣṇenādriḥ sa ropitaḥ |
dṛṣṭaś ca sarva-lokena prakāras tu na lakṣitaḥ ||102||
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
यद्वद्yadvadкак
उत्थापितस्utthāpitasподнята,
तद्वत्tadvatтак
कृष्णेनाद्रिःkṛṣṇenādriḥКришной гора
सsaта
रोपितःropitaḥпоставлена;
दृष्टश्dṛṣṭaśвидели
चcaи
सर्व-लोकेनsarva-lokenaвсе люди,
प्रकारस्prakārasспособ
तुtuже
नnaне
लक्षितःlakṣitaḥзамечен
अनुवाद
Но: Как Кришна поднял гору, так и поставил её на место; все это видели, но как — не заметил никто.
संस्करण
f41e2fe8ea0d · प्रकाशित 24 सित॰ 2026, 9:20:01 pm UTC
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