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हरिभक्तिविलासः · 3.105
॥
देवनागरी
अतएव विष्णुस्मृतौ—
रात्रेस् तु पश्चिमे यामे मुहूर्तौ ब्राह्म्य उच्यते ॥105॥ इति ।
लिप्यंतरण (IAST)
ataeva viṣṇu-smṛtau—
rātres tu paścime yāme muhūrtau brāhmya ucyate ||105|| iti |
छन्द अज्ञात
शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
रात्रेस्rātresночи
तुtuже
पश्चिमेpaścimeв последнюю
यामेyāmeстражу
मुहूर्तौmuhūrtauдве мухурты
ब्राह्म्यbrāhmyaбрахма-
उच्यतेucyateназывается.
इतिitiтак.
अनुवाद
Потому и в «Вишну-смрити»: Две мухурты последней стражи ночи называются брахма-мухуртой.
संस्करण
5e0786632e41 · प्रकाशित 24 सित॰ 2026, 11:34:51 am UTC
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