हरिभक्तिविलासः
Vilāsa 5: On the Seat of Worship5.116गोपाल भट्ट गोस्वामी
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हरिभक्तिविलासः · 5.116
॥
देवनागरी

समुपेत्य रमां प्रथीयसींपुनर् अन्ते हरितां व्रजत्य् असौ ॥116॥

लिप्यंतरण (IAST)

samupetya ramāṁ prathīyasīṁpunar ante haritāṁ vrajaty asau ||116||

छन्द अज्ञात

शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
पुनर्punarзатем
अन्तेanteв конце
हरितांharitāṁприроды Хари
व्रजत्य्vrajatyдостигает
असौasauон.
अनुवाद

обретает великое богатство, а в конце достигает природы Хари.

संस्करण

433b275374d3 · प्रकाशित 24 सित॰ 2026, 11:34:51 am UTC

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