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गोविन्दभाष्य

बलदेव विद्याभूषण (१८वीं शती) का गोविन्दभाष्य — वेदान्तसूत्र पर गौड़ीय वैष्णव भाष्य, ब्रह्म-मध्व परम्परा में। सिद्धान्त — अचिन्त्य-भेदाभेद: सूत्रों का ब्रह्म भगवान् श्रीकृष्ण (गोविन्द) हैं; जगत् उनकी शक्ति का परिणाम है; जीव उनका नित्य अंश है; साधन भक्ति है, फल — पुनरावृत्ति-रहित नित्य सेवा। प्रत्येक सूत्र के लिए भाष्य का रूसी निरूपण।

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Adhyāya 1. Samanvaya (Harmony)