गोपालचम्पूः
The Entry into Goloka2.37.111जीव गोस्वामी
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गोपालचम्पूः · 2.37.111
॥
देवनागरी

जेघ्रीयन्ते कोकूयन्ते सासद्यन्ते जेगिल्यन्ते ।
लोलूप्यन्ते सोषुप्यन्ते चञ्चूर्यन्ते शावास् तेषाम् ॥111॥

लिप्यंतरण (IAST)

jeghrīyante kokūyante sāsadyante jegilyante |
lolūpyante soṣupyante cañcūryante śāvās teṣām ||111||

छन्द अज्ञात

शब्दशः अर्थ
संस्कृतIASTअर्थ
जेघ्रीयन्ते कोकूयन्तेjeghrīyante kokūyanteнюхают и пищат
सासद्यन्ते जेगिल्यन्तेsāsadyante jegilyanteсидят и глотают
लोलूप्यन्ते सोषुप्यन्तेlolūpyante soṣupyanteжадничают и спят
चञ्चूर्यन्ते शावास् तेषाम्cañcūryante śāvās teṣāmснуют их птенцы
अनुवाद

„«А их птенцы то и дело нюхают, пищат, сидят, глотают, жадничают, спят и снуют»“.

संस्करण

7799fd9e03cb · प्रकाशित 25 सित॰ 2026, 6:52:06 am UTC

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